मंगलवार, 5 सितंबर 2017

मोहब्बत....

आँखे है समंदर आप इनमे डूब जाइये...
मोहब्बत का मोती वहाँ से ढूंड लाइए..

आंसू  गिरे मेरे तो आप क्यों तड़प उठे
अब इनकी पाकीजगी पे शक न खाइए

डूब गयी अश्कों में जाने कितनी सल्तनतें
मोहब्बत से बढ़के है कोई दौलत  बताइए

तख्तो ताज छोड़ दिए शहनशाहों ने कई
महबूब के दामन से बड़ी सल्तनत दिखाइए

सब लोग एक है मोहब्बत की नज़र में
 ऐसा खुदा के सिवा कोई है तो बताइए...

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