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मैं...
खुद में मस्त हूँ,मलँग हूँ मैं मुझको बहुत पसंद हूँ बनावट से बहुत दूर हूँ सूफियाना सी तबियत है रेशम में ज्यूँ पैबंद हूँ... ये दिल मचलता है क...
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शेर लिखो,ग़ज़ल या कलाम लिखो ख़ुद ही पढ़ो, ख़ुद ही दाद भी दो ख़ुद ही ढूँढो ख़ामियाँ बनावट में ख़ुद ही तारीफ़ के अल्फ़ाज़ कहो क्यूँकि ज़म...
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धूप का इक उजला सा टुकड़ा आंगन में उतरा चुपके से आँख का आंसू मोती बनके गालो पर ढलका चुपके से फूलों की खुशबु ले हवा चली, चली मगर बि...
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पापा तुम क्यूँ मुझसे दूर गए? भूल गयी मै तबसे हंसना आँख रोज भर आती है सच कहती हूँ पापा,एकदम पंजीरी अब नहीं भाती है मिल न पाऊ,मै अब तुम...
बहुत सच कहा है. मौन की भी अपनी भाषा होती है और जो समझना चाहे वह ज़रूर समझ जाता है..बहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंअभिव्यक्ति का आपका यह अंदाज़ बहुत खूबसूरत है।
जवाब देंहटाएंशुभकामनाएं।
मौन ही श्रेयकर साधन है
जवाब देंहटाएंस्वयं की अभिव्यक्ति का
तुमसे स्नेह करने वाले
मौन को पढ़ लेंगे खुद ही
और बाकि बिना कोई अपवाद
चुपचाप आगे निकल जायेंगे....
बेशक ..सागर में गागर
कमाल कर दिया ..क्या लिखा है चंद पंक्तियों में या यूँ कहो की जैसे मेरे ही भावों को आपने अपने शब्द दे दिए है इसलिए इतना दिल में उतर gaya