रविवार, 29 मार्च 2020

नमक तनहाइयों का काट रहा
धीरे धीरे इमारत-ऐ-ज़िंदगी
उम्र की परतें यूँ चढ़ रही है
नए मायने जीने के गढ़ रही हैं......(आशा)

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