बुधवार, 8 जुलाई 2020

पर्फ़ेक्ट पार्ट्नर

सुनो तुम पर्फ़ेक्ट नहीं हो
कितनी कमियाँ उफ़्फ़
क्या बताऊँ और क्या नहीं
तुम ऐसा नहीं करते
तुम वैसा नहीं करते
कितनी कमियाँ गिनाऊँ
जाओ पता है मुझे, तुम्हें
ढंग कुछ भी नहीं आता ।
लेकिन सुनो आता तो
मुझे भी नहीं सब कुछ
कितनी झल्ली सी हूँ
कितना हड़बड़ायी सी
रहती हुँ हर वक़्त
अपने आप में गुम
अरे अब क्या बताऊँ
के किस कदर
बेतरतीबी से भरी ।
क्या हल निकालें
कुछ सोचो ज़िंदगी
पर्फ़ेक्शन से कैसे गुज़ारें।
तो ऐसा करते हैं चलो
तुम मुझे झेल लो
मैं तुमसे निभा लूँगी
तुम कमा के लाना
मैं घर सम्भालूँगी
हम दोनो अधूरे मिलकर
एक पूर्ण अंक बन जाएँगे....(आशा)

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