बुधवार, 8 जुलाई 2020

नारी

तुम ख़ूबसूरत हो, बहुत ख़ूबसूरत
अद्भुत संयोजन स्नेह और संयम का
समय के साथ निखर गयी हो
पूर्ण कांतिमय कमलिनी सी
समय ने पोषित किया नारीत्व तुम्हारा
सुनो अब तुम हो परिपूर्ण नारी
तुम आधार हो सृष्टि का सारी
मातृत्व की गरिमा से आलोकित
तुम्हारे लहराते केशों में बसी
हुयी महक अब दीवाना नहीं बनाती
ना अब तुम्हारी देह किसी को करती
है अब उत्तेजित,
नयन भी राह नहीं भटकाते,
स्पर्श तुम्हारा नहीं सुलगाता अग्नि
तन मन में वासना नहीं जगाता
अपितु अब तुम गरिमामयी व्यक्तित्व
की स्वामिनी साक्षात देव स्वरूपिणी
ममता का झरना नयनों से बरसाती
अपने स्पर्श मात्र से त्रिशित हृदयो
को शीतलता पहुँचाती, आँचल की
छांव में सबको समेटती हुयी चलती हो
जीवन के अनुभवों की थाती संभाले
बिखराती मुस्कानों के मोती, रेशम
की डोरी सी सबको सहेजती समेटती
पोषित करती,क्षमा और प्रेम का
अद्भुत संयोजन बन सहज भाव से
जीवन के हर उतार चढ़ाव को देखती
निर्बाध नदी सी गहरी और शीतल
स्वयंसिद्धा सर्व व्यापिनि, माँ हो
नारी तुम अद्भुत कृति ईश्वर की...,


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