जब कभी भी घेरते है अँधेरे हालातों के
तू सूरज सी नज़र आती है अब भी माँ
उलझनों में अपनी जब भटकती हूँ
तू नयी राह दिखाती हैअब भी माँ
तपती दोपहर में साए की तरह
ऊँची लहरों में किनारे की तरह
पास बुलाती है मुझे अब भी माँ
मुश्किलों की आँधियों से सदा
तू मुझको बचाती हैअब भी माँ
खो के धीरज जो घबरा जाऊं
एक नया जोश दिलाती हैअब भी माँ
रात दिन दूर तुझसे हूँ बेशक
तेरी दुआओं में हूँ अब भी माँ
सहला जाती यूँही ख्यालों में
तेरी ठंडी नर्म हथेली अब भी माँ
जब भी हो जाता उदास ये दिल
बहला जाती है तू अब भी माँ
नींद जब देर तक नहीं आती
याद आती है तेरी थपकी माँ
जब देखती हूँ अपनी बिटिया को
खयालो में तू ही मुस्कुराती है माँ
इस तरह शामिल है मेरे वजूद में तू
मुझमें में भी तू ही नज़र आती है माँ ....

