बुधवार, 12 जुलाई 2017

मैं जैसी हूँ अच्छी हूँ,
नहीं चाहती बदलना
हाँ मैं ढीठ हूँ
किसी चट्टान की मानिंद

रेशमी लटें नहीं,ना सही
मुझे पसंद हैं ये उलझे,
बेतरतीब घुंघराले बाल
हवा में आवारा उड़ते हुए

थोड़ा ज़्यादा फैले हुए
गाल, गुलाबी रंगत है यार!
एक छोटा सा डिंपल भी है
जो कमसे कम मुझे बहुत पसंद है

ना सही हिरणी से चाल
गज गामिनी ही सही,
क्या फ़र्क़ पड़ता है?
कैट वॉक थोड़े ही करनी है!

कोयल सी अवाज नहीं
खुरदरी भारी ही सही
बदल तो नहीं सकती,
और चाहती भी नहीं
रुआबदार है यार!

जाने क्यूँ दुनिया आमादा
है मुझे बदलने को
जिसे देखो एक आध
सलाह चिपका डालता है
वज़न कम करने की।

क्यूँ भाई जो हैं
पतले छरहरे,
सटीक फ़िगर वाले
उनको कोई रोग नहीं
या फिर ज़िंदगी में
कोई परेशानी नहीं?

मैं ख़ुश हूँ खुदसे
प्लीज़ रहने दो ख़ुश
मत करो किसी से
मेरी तुलना
मैं, मैं हूँ, कोई और
कैसे हो सकती हूँ?

एक साधारण मनुष्य हूँ
अप्सरा नहीं बनना चाहती,
ना ही बननाहै हीरोईन
थाइरॉड मरीज़ हूँ,
ये वज़न शौक़ नहीं,मजबूरी है,
और फिर ये मेरी ज़िंदगी है
जीने दो, मुझे मेरे तरीक़े से ।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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