सोमवार, 13 सितंबर 2010

मेरी कविता...जीवन मेरा




कवितायेँ मेरी जीवन मेरा,
कविताओ में ही जीती हूँ
शब्द पहनती,ओढ़ती हूँ
भावो को खाती पीती हूँ

सुख, दुःख की संगी साथी
कविताये मेरी सब कुछ है 
ये जीवन की गति मेरी
लगता है जैसे इनके बिन 
आधार न मेरा अब कुछ है  

मेरे आंसू,मेरी आहे
मुस्काने,मेरी चाहे
सब कविताओ में ढलते है 
सब खट्टे मीठे पल मेरे  
कविताओ में ही पलते है

जब टीस कोई तडपाती है
एक कविता बन जाती है
आंसू के मोती चुन चुन के 
सुन्दर माला गूँथ जाती है

खुशियों के फूल जो खिलते है
कविताओ में ही चुनती हूँ
जो भी जी में आजाये बस
कविताओ में ही बुनती हूँ

मेरे सुन्दर कोमल सपने
बेलोस यहाँ पर बढ़ते है
मेरे सारे अनघड अरमां
परवान यहीं पर चढ़ते है

ढूंढे कोई मुझ को गर
कविताओ में ही मिलती हूँ
अपनी हर बिखरी याद को
कविताओ में ही सिलती हूँ

कविता मेरी धड़कन जैसी
रुक जाएँ, मै रुक जाउंगी
कविता मेरा अंतिम ठौर 
अब और कहाँ मै जाउंगी






2 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर कविता ! हिन्दी दिवस की बहुत बहुत बधाई !

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  2. मेरे आंसू,मेरी आहे
    मुस्काने,मेरी चाहे
    सब कविताओ में ढलते है
    सब खट्टे मीठे पल मेरे
    कविताओ में ही पलते है


    bhagwan ne aapko huner diya hai to bherpur uska fayada uthiye or issi tarah hamain roz 1 nayi asha se milwaiye :)

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