शुक्रवार, 4 मार्च 2011

बदलती हवाएं...........

हवाओं ने रुख बदला है संभालो
अँधेरा चारों ओर देखो फ़ैल रहा है
जता दिया हमे बादल ने घुमड़ कर  
मौसम बदल रहा है,दिल डोल रहा है!!!

जागो अब अपनी सुध लो यारो  
पुराने सारे साए धुंधलाने लगे है
जिन ठूंठों के सहारे चढ़ रही थी
लहराती बेलें वो अब चटकने लगे हैं

सन्नाटे आगाज़ हैं नए तूफान के
समंदर भी भीतर भीतर खौल रहा है
गुलिस्तान उजड़ने की देहलीज़ पर है
उड़ गयी कोयले, शाखों पे उल्लू बोल रहा है

मजधार में नावों को डुबो रहा है माज़ी
घर को हमारे देखो कोतवाल लूट रहा है
किस पे करें भरोसा, कोई ये बताये
देखो जिधर हर कोई मुह मोड़ रहा है

दूर परदेश में छुपायी है दौलते
घर में है मुफलिसी ये कौन देख रहा है
हाकिम ही है बेबस जब अपने वतन में
अब कौन होगा रहनुमा दिल ये सोच रहा है...




 

2 टिप्‍पणियां:

  1. दूर परदेश में छुपायी है दौलते
    घर में है मुफलिसी ये कौन देख रहा है
    हाकिम ही है बेबस जब अपने वतन में
    अब कौन होगा रहनुमा दिल ये सोच रहा है...

    sach me.........bahut sach kaha aapne,
    jisko kaha hamne tu hamare dekh rekh kar..wahi lutega to kya man se niklega...hai na aasha jee.!

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