शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

मेरा हर दिन.....

नित नए संकल्प लिए
उगता है मेरा हर दिन
और ह्रदय में उमड़ते
नित नए बवंडर
विचारों की बरसात में
भीगती,खयाली पुलाव
पकाती,खुद ही मुस्कुराती
जाने कितने स्वप्न बुनती हूँ
कुछ खुशियों के महकते फूल,
थोड़े आंसू,थोड़े गम के कांटे
सारा दिन पलकों से चुनती हूँ
भागती फिरती हूँ,अनजानी सी 
अनकही बाते जाने कैसे सुनती हूँ
लोग कहते है,तुम पगली हो
मान लेती हूँ चुपसे,औ 
इस तरह पल-पल सरकता है
मन मेरा रेत सा दरकता है
अनबुझ पहेली सी मैं दिखती हूँ
बीत जाती है मेरी हर साँझ
यूँ ही आहिस्ता -आहिस्ता
फिरसे कल दिन उगेगा मेरा
लिए नए सकल्प,नए बवंडर........

4 टिप्‍पणियां:

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  2. कुछ खुशियों के महकते फूल,
    थोड़े आंसू,थोड़े गम के कांटे
    सारा दिन पलकों से चुनती हूँ
    भागती फिरती हूँ,अनजानी सी
    अनकही बाते जाने कैसे सुनती हूँ

    bahut achhi rachna, pagli ki baat pagli man ko chhoo gayi, apni-apni si lagi.

    shubhkamnayen

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  3. आदरणीया आशा जी
    सादर अभिवादन !

    मेरा हर दिन... बहुत ख़ूबसूरत रचना है -
    विचारों की बरसात में भीगती,
    खयाली पुलाव पकाती,
    खुद ही मुस्कुराती
    जाने कितने स्वप्न बुनती हूँ
    कुछ खुशियों के महकते फूल,
    थोड़े आंसू,थोड़े गम के कांटे
    सारा दिन पलकों से चुनती हूँ


    भावों और शब्दों की सुंदर बुनावट !
    …और बिल्कुल बोझिलता नहीं कविता में …

    बधुत बहुत बधाई ! सुंदर सृजन सारी रहे … मंगलकामना है !

    आपको
    बीते हुए हर पर्व-त्यौंहार सहित
    आने वाले सभी उत्सवों-मंगलदिवसों के लिए
    ♥ हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !♥
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  4. कोमल और सुन्दर अहसास वाली कविता बहुत पसंद आई !
    आपको बधाई !

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