शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

मै थी,हूँ,और हमेशा रहूंगी…

जब लगने लगे कि कोई साथ नहीं


पलट के देखना एक बार…..

साथ तुम्हारे मै थी,हूँ,और हमेशा रहूंगी…



रोक ले जब आंधियां रास्ता तुम्हारा,

छूटने लगे कही दूर किनारा..दिखे न कोई सहारा….

बस बढाना हाथ एक बार…

साथ तुम्हारे मै थी,हूँ और हमेशा रहूंगी..



सोचो को अपनी दे दो विराम…

छोड़ के सारी परेशानियां करो विश्राम…

नयन मूंद देखो स्वप्न अभिराम….

क्यूंकि समेटने को तुम्हारी तकलीफे तमाम

वही, कही पास तुम्हारे…

मै थी,हूँ और हमेशा रहूंगी…..

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